*कालसर्प योग*
सम्प्रति ज्योतिषीय योगों में *कालसर्प* नामक योग लोगों को अधिक भयाक्रांत कर रहा हैं। कुंडली में कालसर्प योग है ऐसा जान करके जातक अत्यंत अवसाद ग्रस्त और हतोत्साहित हो जाता है परंतु अन्य ज्योतिषीय नक्षत्र जनन योगों की तरह कालसर्प योग के शांति का भी विधान है जिसको संपन्न करके जातक आजीवन आमोदित हो सकता है।
*कालसर्प योग कैसे बनता हैं*
मध्यस्था चेत् ग्रहाः सर्वे राहुकेतु-द्वयोस्तदा।
योगो हि कालसर्पाख्यः भेदा द्वादशधा शृणु।।
जब किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु और केतु के बीच सभी ग्रह आ जाते हैं तो कालसर्प योग बनता है। ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह माना जाता है जो अक्सर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। यह भी मानता है कि जातक पूर्व के किसी जन्म में सर्प या नाग की हत्या करता है अथवा उसे नष्ट कर देता है तो ऐसे व्यक्ति के कुंडली में कालसर्प नामक योग बनता है उसके दुष्प्रभाव व्यक्ति पर पढ़ते हैं। कालसर्प योग विशेषता राहु केतु की दशाओं में अधिक प्रबल होता है।
*कालसर्प योग के प्रकार*
कालसर्प योग के 12 प्रकारों के नाम दिए गए हैं:
1. अनंत कालसर्प योग:
यह योग राहु के पहले घर में और केतु के सातवें घर में होने पर बनता है।
2. कुकिल कालसर्प योग:
राहु के दूसरे घर में और केतु के आठवें घर में होने पर यह योग बनता है।
3. वासुकि कालसर्प योग:
राहु के तीसरे घर में और केतु के नौवें घर में होने पर यह योग बनता है।
4. शंखपाल कालसर्प योग:
राहु के चौथे घर में और केतु के दसवें घर में होने पर यह योग बनता है।
5. पद्म कालसर्प योग:
राहु के पांचवें घर में और केतु के ग्यारहवें घर में होने पर यह योग बनता है।
6. महापद्म कालसर्प योग:
राहु के छठे घर में और केतु के बारहवें घर में होने पर यह योग बनता है।
7. तक्षक कालसर्प योग:
राहु के सातवें घर में और केतु के पहले घर में होने पर यह योग बनता है।
8. कर्कोटक कालसर्प योग:
राहु के आठवें घर में और केतु के दूसरे घर में होने पर यह योग बनता है।
9. शंखचूड़ कालसर्प योग:
राहु के नौवें घर में और केतु के तीसरे घर में होने पर यह योग बनता है।
10. घातक कालसर्प योग:
राहु के दसवें घर में और केतु के चौथे घर में होने पर यह योग बनता है।
11. विषधर कालसर्प योग:
राहु के ग्यारहवें घर में और केतु के पांचवें घर में होने पर यह योग बनता है।
12. शेषनाग कालसर्प योग:
राहु के बारहवें घर में और केतु के छठे घर में होने पर यह योग बनता है।
सभी स्थितियों में सूर्यादि सभी ग्रहों का राहु केतु के मध्य में होना आवश्यक है किंतु पापग्रह यदि बाहर हो तब भी कालसर्प योग का प्रभाव रहता है।
*कालसर्प योग के प्रभाव*
कालसर्प योग से व्यक्ति को जीवन में कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं, जैसे कि:
आर्थिक समस्याएं
दांपत्य जीवन में अनबन
अकाल मृत्यु का भय
मानसिक कष्ट
काम में बाधा आना
पुत्र की हानि
आजीविका में बाधा
स्वजनों से त्याग
*विशेषता जिस जिस भाव में राहु केतु स्थित होते हैं और जिन भावों में ग्रहों को आच्छादित किए रहते हैं उन भावों का अवरोध होता है।
*कालसर्प योग के लक्षण*
कालसर्प योग के होने पर कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे कि:
सपने में सांप या मृत लोग दिखाई देना
घर में क्लेश रहना
कोई फैसला न कर पाना
काम में बाधा आना
मांगलिक कार्य ना हो पाना
दृष्टि संबंधी समस्याएं
नकारात्मक विचार
शिक्षा और नौकरी में बाधा
प्रेम संबंधों में परेशानी
संतान संबंधी कष्ट
रोग
इत्यादि।
कालसर्प योग से बचने के उपाय:
कालसर्प योग से बचने के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं, जैसे कि:
भगवान शिव की पूजा करना
शिवलिंग पर जल चढ़ाना
रुद्राभिषेक करना
महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना
कुल देवता की पूजा करना
हनुमान जी की पूजा करना
कालसर्प दोष शांति
परमपिता परमेश्वर की कृपा और एक कुशल ज्योतिषी के मार्गदर्शन में कालसर्प दोष का निवारण संभव है।
पं०विष्णु मिश्र (ज्योतिषाचार्य)
सुरसरि ज्योतिष संस्थान
प्रयागराज
8756568922